ITI – 1st SEMESTER Electrician trade Chapter – 1

ITI – 1st SEMESTER Electrician trade Chapter – 1

व्यावसायिक सुरक्षा एवं स्वास्थ्य

• स्थिर वैधुत की खोज – थेल्‍स

ITI - 1st SEMESTER Electrician trade Chapter – 1
ITI – 1st SEMESTER Electrician trade Chapter – 1

• चल वैधुत की खोज – वोल्टा

• यूनानी वैज्ञानिक थेल्स ने कहरवा नामक पदार्थ की छड़ को रेशम से रगड़कर उसके द्वारा कागज के छोटे छोटे टुकडो को आकर्षित करने में सफलता प्राप्त की ।

• ऊर्जा संरक्षण के नियम के अनुसार ऊर्जा न तो पैदा की जा सकती हैं और ना ही नष्ट की जा सकती है।

विधुत झटका लगने का कारण

1. 90 वोल्ट से अधिक वोल्टता पर हमे विधुत झटका लगता हैं।

2. विधुत धारा का वेग प्रकाश के वेग3×10M/sec के बराबर होता हैं।

3. अनेक यूरोपीय देशों जलयानों, थलयानों,वायुयानों, पनडुब्बीयो आदि में मेन सप्लाई 110 वोल्टेज रखें जाते है।

निषेधात्मक संकेत- इस प्रकार के संकेत का उपयोग किसी कार्य को नही करने के लिये किया जाता हैं।

1. बैक ग्राउंड- सफेद

2. आकृति – काली

3. बॉर्डर- लालरंग

4. क्रास बार -लाल रंग

5. आकार – व्रताकर

2.अनिवार्य (सकारात्मक) संकेत

इस प्रकार के संकेत का उपयोग विशेष रूप से किसी कार्य को करने के लिये किये जाता हैं।

• आकार – व्रताकार

• पृष्ठभूमि -नीला

• आकृति – सफेद

3.चेतावनी संकेत

इस संकेत का उपयोग किसी ख़तरे की चेतावनी देने के लिए किया जाता है।

• आकृति- त्रिभुजाकार आकार

• आकृति का रंग- काला

• पृष्ठभूमि-पीला

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4.सूचकांक संकेत

सूचनाओं की जानकारी के लिए

• आकार- वर्गाकार

• आकृति – सफ़ेद

• पृष्ठभूमि- हरा

1. कृत्रिम श्वसन क्रिया

1. सिलवेस्टर विधि – इस विधि में पीड़ित को पीठ के बल लिटाया जाता है । उसकी पीठ के नीचे तकिया लगा दिया जाता है। इस विधि का प्रयोग तब किया जाता है जब पीड़ित के सीने की और छाले पड़े हो ।

2. शैवाल विधि –

इस विधि में पीड़ित को पेट के बल लिटाया जाता हैं यह विधि तब प्रयोग की जाती है जब पीड़ित की पीठ पर छाले पड़े हो ।

3.मुँह से मुँह में हवा भरना

यह सर्वाधिक प्रचलित विधि है तथा अधिक प्रभावशाली विधि है । आग की किसमे

1. श्रेणी “ए” अग्नि – लकड़ी , कागज, कपड़ा जुट आदि में लगी आग को बुझाने के लिये शीतलजल की बौछार की जाती है ।

2. श्रेणी “ब” अग्नि – ज्वलनशील द्रवों एवं ठोसों जैसे मिट्टी का तेल डीज़ल पैट्रोल आदि में लगी आग बुझाने के लिये झाग वाले यन्त्र तथा co2 वाले यन्त्र उपयुक्त रहते हैं।

3.श्रेणी ”C” अग्नि – सिलेंडर आदि में भरी LPG गैस में लगी आग को बुझाने के लिये शुष्क चूर्ण वाले यन्त्र उपयुक्त रहते हैं।

4. श्रेणी “D” अग्नि – बिजली के तारों उपकरणों एवं धत्विक पदार्थों में लगी आग को बुझाने के लिये Co2 शुष्क चूर्ण CTC अग्नि शामक यंत्र उपयुक्त रहते है इसके अतिरिक्त शुष्क रेत भी प्रयोग की जा सकती हैं।

• विधुत धारा की वह मात्रा जिसमे एक सेकंड समय के साथ 6.24 ×10 इलेक्ट्रान प्रवाहित ही जाए एक मानक एम्पियर कहते हैं।

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